वात रोग की सम्पूर्ण जानकारी और इसका घरेलू उपचार

Written by Oye Zindagi Team

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वात रोग (Arthritis in Hindi): आयुर्वेद के अनुसार इंसान में होने वाले रोगों का मुख्य कारण वात, पित्त और कफ (Vata, Pitta and Kapha) का दोष ही होता है। इनमें से मुख्य कारण वात को ही माना गया है। वात या वायु विकार की जांच किसी योग्य चिकित्सक से करवाकर इसका सही इलाज ही आपको इस रोग से मुक्ति दे सकता है। हालांकि, एलोपैथी में इसकी पूर्ण चिकित्सा संभव नहीं है लेकिन आयुर्वेद (Ayurveda) से इसका सही निदान संभव है। 

आज हम आपको अर्थराइटिस यानि वात रोग का सही और कामयाब देसी इलाज (Arthritis ka gharelu upchar) बताने वाले हैं। जो आपको इस रोग से मुक्ति जरूर दिला देगा, ऐसा हमारा विश्वास है। 

वायु विकार (Air disorder) कितने प्रकार के होते हैं

वात विकार या वायु दोष (Vaayu dosh) को मुख्यत: पाँच भागों में बांटा गया है।

पहला: उदान वायु- यह कंठ में वास करती है जैसे डकार।

दूसरा: अपान वायु- यह बड़ी आंत से लेकर मलाशय तक वास करती है।

तीसरा: प्राण वायु- हृदय के ऊपरी भाग में वास करती है।

चौथा: व्यान वायु- यह सारे शरीर में व्याप्त है।

पांचवा: समान वायु- इस वायु का स्थान आमाशय से लेकर बड़ी आंत में होता है।

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वातरोग की पहचान और लक्षण

Arthritis Symptoms in Hindi: वायु रोग (Air sickness) हो जाने पर मांस पेशियों में खिंचाव और दर्द, रीड की हड्डी में दर्द, सिर में दर्द, गर्दन और घुटनों में दर्द, जोड़ों और हड्डियों में दर्द, पेट में गैस बनना या पेट फूलना, पेशाब में जलन होना, माइग्रेन, जोड़ों में ऐंठन, एसिड बढ़ जाना और खट्टी डकारें आना इसके मुख्य लक्षण है। इसके अलावा बार बार प्यास लगना, मुंह और गला सूखना, त्वचा का रूखा होना और मूत्र रोग भी इसकी पहचान है।

वात रोग के कारण 

वात रोग के होने के मुख्य कारणों में अत्यधिक गरिष्ठ भोजन करना (oily or junk food), भोजन का ठीक से ना पकाया जाना, दूषित और बसी भोजन, बहुत अधिक ठंडा पानी पीना, खाना खाने के तुरंत बाद पानी पीने की आदत, शुद्ध पानी ना पीना और अचार और तेल में पकाए भोजन अधिक करना इत्यादि। 

इसके अलावा शराब पीना, मीट मांस का अधिक सेवन, देर रात तक जागते रहना और व्यायाम ना करना इसके कारण माने जा सकते हैं। अगर साफ साफ कहा जाए तो अर्थराइटिस होने के कारणों का समुचित निदान ही Arthritis ka gharelu upchar कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।

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वातरोग का इलाज 

Arthritis Treatment in Hindi: वैसे तो वात रोग का एलोपैथी से सम्पूर्ण निदान संभव नहीं है लेकिन अपनी दिनचर्या में बदलाव करके हम कुछ हद तक इस पर काबू पा सकते हैं। इसके लिए प्रतिदिन सुबह योग करने की आदत डालें। खाने में हल्के और सुपाच्य भोजन (Digestible food) को वरीयता दें। हरी पत्तेदार सब्जियां और सलाद का भरपूर उपयोग करें। अधिक से अधिक पानी पीएं लेकिन वो भी हल्का गुनगुना।

वात रोग में क्या परहेज करें 

Arthritis ka gharelu upchar की अगर बात की जाए तो सबसे पहली बात है इसका परहेज। कहते है की परहेज इलाज से बेहतर होता है। वात रोग (Vata Disease) अथवा वायु रोग में अचार, तेलीय सब्जियां और चावल का परहेज जरूर करें। इसके अलावा मुली, संतरा-नींबू, गोभी, टमाटर, अमरूद और चना तथा दही खाने से यथासंभव बचने की कोशिश करें। खाना बनाने में गरम मसालों का प्रयोग ना ही करें या बहुत कम करें।

वात रोग के लिए घरेलू नुस्खे 

सुबह खाली पेट नीम गिलोय का रस पीये, आंवला चूर्ण नित्य सुबह उठ कर एक चम्मच खाली पेट लें, लहसुन को सूखा कर उसका चूर्ण बना ले हफ्ते में तीन दिन उसका सेवन करें। गुडहल के फूल का चूर्ण बना कर उसकी चाय बना कर पीने से वात (Vat), पित्त (Pitt) और कफ (Cough) दोनों सामान्य हो जाते है। 

इसके अलावा अश्वगंध, चोपचीनी, पीपलामूल, सोंठ का समान मात्रा में पिसा हुआ एक चम्मच चूर्ण सुबह शाम दूध के साथ लें। रात को सोते समय 10 ग्राम मेथी दाना साबुत निगल लें और हल्का गुनगुना पानी पीकर सो जाएं। 

1 thought on “वात रोग की सम्पूर्ण जानकारी और इसका घरेलू उपचार”

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